आ गये आ गये

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

आ गये आ गये इक नही दो नही आये कई हजार,

स्वान का मेला भोले आये हरिद्वार,

आ गये आ गये गंगा नहाने आये,

जल चडाने आये कावड़ ले जाने आये,

आ गये आ गये...

भक्त तेरे अलबेले बड़े मस्ताने है,

लाल लंगोटा आये बांध दीवाने है,

सब के मन में इक लगन है सब को करना तेरा दर्शान है,

गुण गाये बम बम के पिये खाली है,

आ गये आ गये................

मन भावन ये नगरी अजब नजारा है,

याहा तक नजर तेरा जैकारा है,

लाखो कावाड तयार पड़ी है मंदिरों में भी भीड़ भरी है,

नील कंठ का मंदिर सब को प्यारा है,

आ गये आ गये.......

निर्मल धारा गंगा जी की नहाने को,

भक्तो का न जी करता घर जाने को,

भोले सब पे प्यार लुटादे सब के वेडे पार लगा दे,

कमल सिंह और शर्मा खड़े गुण गाने को,

आ गये आ गये..............

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।