जीमे मर्जी एह जिन्दगी चला देवे

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॥ पावन पाठ ॥

जीमे मर्जी एह जिन्दगी चला देवे असी साईं उते छड़ियाँ ने डोरियाँ

चाहे रंक या बादशाह बना देवे असी साईं उते छड़ियाँ ने डोरियाँ ,

बेह्जा मन विच रख के तसली नु करू मेहर ओ नजर तसली नु,

ओह ता दुखियां दे दुखड़े मिटा देवे असी साईं उते छड़ियाँ ने डोरियाँ ,

आसा सब दियां पुरियां है करदा,झोली भगता दी साईं मेरा भरदा,

ओ ता फुला वांगु जिंदगी सजा देवे असी साईं उते छड़ियाँ ने डोरियाँ ,

जदों कट दा चोरासी वाले गेड नु ओह ता कर देवे चानन हनेर नु,

आपे मना विचो परदे हटा देवे असी साईं उते छड़ियाँ ने डोरियाँ ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।