वेहड़े वेख लई ओहना दे सदा पार होंगे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

वेखि खुल्दे नसीब तेरे जेहड़े ने करीब,

ओहो कदे भी न विच मजधार होंगे,

वेहड़े वेख लई ओहना दे सदा पार होंगे

ओहना सदा तेरे ही बाने नू मन लेना है,

कम ना कोई अड़ना तू नाल जदो रहना है,

घर रखे भी ओहना दे दो तो चार होंगे,

वेहड़े वेख लई ओहना दे सदा पार होंगे

जाने जाना दाती जिह्ना तेरी पेहचाहन तो.

ओहना नू माँ नेकी सदा मिलनी जहां तो,

तेरे प्यार दे माँ ओहि हक़ दार हों गे,

वेहड़े वेख लई ओहना दे सदा पार होंगे

बत्ती विचो लोह जीवे दीना वाले दसे न,

इम्तेहान बिना माँ दा प्यार आउंदा हिसे ना,

जेहड़े पूज्दे नि माहि शर्म सार होंगे,

वेहड़े वेख लई ओहना दे सदा पार होंगे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।