कोई माँ तेरे जैसे दौलत नहीं है

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॥ पावन पाठ ॥

कोई माँ तेरे जैसे दौलत नहीं है,

जरा सी भी तुझमे नफरत नहीं है,

कोई माँ तेरे जैसे दौलत नहीं है,

निगाहो ने देखे है चेहरे हज़ारो,

कोई माँ तेरे जैसी सूरत नहीं है,

कोई माँ तेरे जैसे दौलत नहीं है,

तुझे दर्द देते है कुछ तेरे बेटे,

मगर तुमको उनसे शिकायत नहीं है,

कोई माँ तेरे जैसे दौलत नहीं है,

मेरी माँ तेरा हक़ अदा कर सके जो,

किसी में भी इतनी ताकत नहीं है,

कोई माँ तेरे जैसे दौलत नहीं है,

जिसे माँ ने सीने से अपने लगाया,

ज़माने की उसको जररूत नहीं है,

कोई माँ तेरे जैसे दौलत नहीं है,

तेरे सामने क्या दुनिया ये दौलत,

ज़माने में तुझ जैसी रेहमत नहीं है,

कोई माँ तेरे जैसे दौलत नहीं है,

अनीस उसको रब से सदा गम मिले गे,

जिसे अपनी माँ से महोबत नहीं है,

कोई माँ तेरे जैसे दौलत नहीं है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।