दिन खुशियां वाला आ गया

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

आज सत जुलाई आई आ,

आज घर घर वजी वधाई आ,

गुरु जी दा जन्मदिन आ गया जय गुरु जी,

दिन खुशियां वाला आ गया जय गुरु जी,

आओ भागा वाली संगत जी,

आज अपनी वेखो रंगत जी,

हर कोई नचदा आ गया,जय गुरु जी,

दिन खुशियां वाला आ गया जय गुरु जी,

तेरे दर ते जदो दे आ गये,

दिन खुशिया वाले आ गये,

मैं भी भाग जगावण आ गया,जय गुरु जी,

दिन खुशियां वाला आ गया जय गुरु जी,

आज तारण वाला आया है,

दिन शगुना वाला आया है,

साहनु नशा नाम दा छा गया जय गुरु जी,

दिन खुशियां वाला आ गया जय गुरु जी,

असि बड़े भागा वाले आ,

असि सारे गुरु जी वाले आ,

दर्शा नु तेरा भा गया जय गुरु जी,

दिन खुशियां वाला आ गया जय गुरु जी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।