सब कुछ मिलता जाता है माँ बाप नहीं मिलते

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॥ पावन पाठ ॥

सब कुछ मिलता जाता है माँ बाप नहीं मिलते,

ज़िंदगी भर पछताते जो कदर नहीं करते,

माँ बाप से बढ़ कर दुनिया में कुछ भी नहीं,

वो संग नहीं तेरे तो कुछ भी संग नहीं,

किस्मत वाले है वो जो इनका प्यार पाते है

ज़िंदगी भर पछताते जो कदर नहीं करते,

माँ का अंचल सिर पर है वो जन्नत क्या होगी,

पिता भी संग रहे वो दौलत क्या होगी,

जो करते इनका बुरा वो बुरा ही बरते है,

ज़िंदगी भर पछताते जो कदर नहीं करते,

जब मुशीबत में था तू माँ बाप ने देखा,

तूझे पढ़ा लिखा कर के इक सपना था देखा,

जब तेरी बारी थी तू भूल गया इनको,

ज़िंदगी भर पछताते जो कदर नहीं करते,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।