मिलना सब से बन्दे प्रेम और प्यार से

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॥ पावन पाठ ॥

मिलना सब से बन्दे प्रेम और प्यार से,

एक दिन जाना होगा झूठे संसार से ।

अपनी अदालत में मालिक बुलाएगा,

उसके फैसले से तुझको कौन बचाएगा ।

आँसू बहायेगा तू कर्मो की मार से,

एक दिन जाना होगा झूठे संसार से ॥

ईश्वर की भक्ति में जिसे विशवास हुआ,

प्रभु उसके पास और वो प्रभु जी के पास हुआ ।

रावण का नास हुआ उसके अहंकार से,

एक दिन जाना होगा झूठे संसार से ॥

भक्ति की भावना से ऐसे से भी मोड़ आए,

अपने भकत की खातिर नंगे पाँव दौड़ आए ।

बैकुंठ छोड़ आए गज की पुकार से,

एक दिन जाना होगा झूठे संसार से ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।