झूम रहा खुशियों से मन

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

झूम रहा खुशियों से मन मेरे साईं आने वाले है,

छोड़ के अब शिर्डी का आंगन मेरे साईं आने वाले है,

झूम रहा खुशियों से मन मेरे साईं आने वाले है,

आज फिजा का रंग अलग है आज जुदा हरयाली है,

लगता है मुझको भी किस्मत मेरी बदल ने वाली है,

बोल रहा मन का दर्पण मेरे साईं आने वाले है,

छोड़ के अब शिर्डी का आंगन मेरे साईं आने वाले है,

शिर्डी से शोख हवाए मुझको बताने आई है,

मेरे साईं जी ने मुझपर अब किरपा बरसाई है,

मिट जायेगी सारी उल्जन साईं आने वाले है

छोड़ के अब शिर्डी का आंगन मेरे साईं आने वाले है,

सुना आँगन सुना जीवन आज सभी खिल जाएगा,

साईं की किरपा का आंचल हम को भी मिल जाएगा,

पारस हो जाएगा जीवन साईं आने वाले है

छोड़ के अब शिर्डी का आंगन मेरे साईं आने वाले है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।