भंगियाँ में डूभ गये हो

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भंगियाँ में डूभ गये हो सुध विसराओ भोला जी,

मैं थक गई भंगियाँ पीसत हाथ दुखायो भोला जी,

भंगियाँ में डूभ गये हो सुध विसराओ भोला जी,

मेवा मिश्री आप के मन को जाने क्यों नहीं भाते,

कंध मूल और फल से क्यों नहीं अपना भूख मिटाते,

क्यों बेल की पत्तियां तेरे मन को भायो भोला जी,

भंगियाँ में डूभ गये हो सुध विसराओ भोला जी,

देवो में तुम महादेव हो फिर क्यों ऐसा करते,

नशा नष्ट कर देता सब कुछ भोले क्यों नहीं डरते,

अब पूजा विनती करती मान भी जाओ भोला जी,

भंगियाँ में डूभ गये हो सुध विसराओ भोला जी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।