सब संगत नु वधाई होवे

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॥ पावन पाठ ॥

सब संगत नु वधाई होवे,

दिन सत जुलाई दा आया,

मैं दर्श गुरा दा पाया,

सब संगत नु वधाई होवे,

संगता ने फूल बरसाए मेरे गुरु जी तारण आये,

आज सब दे दिल हरषाये सब संगत नु वधाई होवे,

शृष्टि दा बालक आया ओहने आ के सुख बरसाया,

कश्ता नु ओहने मिटाया,

सब संगत नु वधाई होवे,

तेरी जय जय कार करा मैं तनु हर पल याद करा मैं,

मैनु बक्शन वाला आया सब संगत नु वधाई होवे,

सब जाने कुल ज़माना गुरु जी नु दिल च वसा,

ओहदा हर यस मैं ता गाना सब संगत नु वधाई होवे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।