करे भोले की बदनाम बंग है

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

करे भोले की बदनाम बंग है नशा दुनिया करे से,

चस्का अपना ही अपना रंग है नशा दुनिया करे से,

गुरु भगति का राम को सरूर है,

श्याम राधा के चस्के में चूर है,

देखो चस्के में नाचे अंग अंग है,

नशा दुनिया करे से,

शिव की मस्ती में मस्त मस्ताने,

सूटा मारे के चिलम का दीवाने,

ऋषि मुनियो का अपना ही ढंग है,

नशा दुनिया करे से,

अरे मस्ती भंग की कमल सिंह ये अनोखी,

राम अवतार पी ले भोले की भुटटी,

मेरा भोला तो मस्त मलंग है ,

नशा दुनिया करे से,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।