दादी इतनो सो कर

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

दादी इतनो सो कर दो बेटी के सिर पे,

थे हाथ जरा धर दयो

सेवा में ले लीजो मने एसो ही घर दयो,

जीवे मंदिर हो थारो एसो हो दर दयो,

थे हाथ जरा धर दयो

सासु हो वे स्याणी,सुसरो हॉवे ज्ञानी,

जो पग पूजे थारा एसो ही वर दयो,

थे हाथ जरा धर दयो

थाने देख के मैं जागु थाने देख के ही सोउ,

जठे ज्योत जगे थारी एसो ही घर दयो,

थे हाथ जरा धर दयो

मंनडे की कह पाउ थासु भूलू बतलाऊ,

थारी स्वाति के मन की हर्ष कवे कर दयो,

थे हाथ जरा धर दयो

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।