चलो चले माँ के दरबार

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

चलो चले माँ के दरबार कहने अपनी दिल की आस,

माँ तो सब की सुनती है करती सब किरपा अपार,

जय माता दी जय माता दी,

कोई पैदल पैदल जाये,

कोई बैठ पालकी जाये,

जो जैसे भी जाये मैया सब को गले लगाये,

कोई खाली हाथो जाये कोई जेवर माल चढ़ाये,

कोई ढेरो फूल चढ़ाये कोई आंसू सिर्फ चढ़ाये,

जो जैसे भी जाये मइयां सब को गले लगाये,

कोई पैदल पैदल जाये.......

कोई इकला इकला जाये.,

कोई भीड़ भीड़ में जाये,

कोई डोली के संग जाये कोई हमजोली संग जाये,

जो जैसे भी जाये मइयां सबको गले लगाये,

कोई पैदल पैदल जाये............

कोई बाल बकियाँ जाये,

कोई पहियाँ पहियाँ जाये,

कोई घुटनो के बल जाये कोई दौड़ा दौड़ा जाये,

जो जैसे भी जाये मइयां सबको गले लगाये,

कोई पैदल पैदल जाये............

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।