कभी सँवारे तू मेरे घर में आ जाना

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कभी सँवारे तू मेरे घर में आ जाना,

मगर आना इस तरह तू के यहाँ से फिर न जाना,

तू मेरी धड़कने तू मेरी सांस है,

हर घडी नजरो को तेरी ही प्यास है,

तू ही मेरे मन में है,

तू ही मेरे तन में है,

जब से तुझको जाना है मैंने अपना माना है,

मगर आना इस तरह से तू फिर यहाँ से ना जाना,

कभी सँवारे तू मेरे घर में आ जाना,

आस तू जिंदगी की मेरे सँवारे,

लिख दिए जिंदगी बस तेरे नाम है,

तू ही मेरी आँखे है सुनी तन्हा राहो में,

चाहे जितनी दुरी हो तुम हो मेरी रहो में,

मगर आना इस तरह से तू फिर यहाँ से ना जाना,

कभी सँवारे तू मेरे घर में आ जाना,

तू नहीं है मगर फिर भी तू पास है,

बात हो कोई भी तेरी ही बात है,

तू ही मेरे अंदर तू ही मेरे बहार है,

जब से तुझको जाना है मैंने अपना माना है,

मगर आना इस तरह से तू फिर यहाँ से ना जाना,

कभी सँवारे तू मेरे घर में आ जाना,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।