सर पे मोर मुकुट है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सर पे मोर मुकुट है साजे और घुंघराले बाल

सांवरे क्या कहना ..........

माथे चन्दन टीका सोहे कुण्डल करे कमाल

सांवरे क्या कहना ..........

मोटी मोटी आँखों से मीठी मीठी बातों से दिल को चुराए तू

तेरी मुस्कान ऐसी लागे रे कटारी जैसी पागल बनाये तू

बनरा बनके बैठा तू तो तेरी नहीं मिसाल

सांवरे क्या कहना ..........

हीरो मोतियों के गहने बाघा पचरंगी पहने लागे बड़ा हेंडसम

लागे क्यूट क्यूट श्याम करूँ मैं सलूट श्याम करूँ तेरा वंदन

देख तुझे मस्ती छ जाती नाचूं नौ नौ ताल

सांवरे क्या कहना ..........

सांवरे ये मोरछड़ी तेरे साथ है कड़ी झाड़ा चमत्कारी है

जानता है चोखानी लीला तेरी वरदानी देव दातारि है

तेरे दर पे जो झुक जाये करे तू मालामाल

सांवरे क्या कहना ..........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।