गुफा मोहरे खड़ के

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

गल सुन ले पेहरेदारा जोगी बिन साडा नहीं गुजारा,

रूह राजी कर लें दे गुफा मोहरे खड़ के,

इक सेल्फी कर लें दे गुफा मोहरे खड़ के

कोई भजाउँदा ढोलक चिमटा कोई भजाउँदा छैने,

दर तेरे ते पैन धमाला भगता दे की कहने,

आज दिल दियां कर लें दे गुफा मोहरे खड़ के

इक सेल्फी कर लें दे गुफा मोहरे खड़ के

बाबा जी दे भगत प्यारे चल पंजाब तो आये,

सिद्ध जोगी ने चिठियाँ पा के दर आप भुलाये,

चा पुरे कर लें दे गुफा मोहरे खड़ के

इक सेल्फी कर लें दे गुफा मोहरे खड़ के

बिबिया बेहना ताई मिल के दर दे गिद्दा पौना,

कमाल पुरिये ने भी सारा दिल दा हाल सुनाना,

सिर चरनी धर लें दे गुफा मोहरे खड़ के

इक सेल्फी कर लें दे गुफा मोहरे खड़ के

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।