थारो देख लियो दरबार

सौरभ मधुकर
अन्य भजन रानी सती दादी भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

थारो देख लियो दरबार

इब के मांगन की दरकार

नाही हीरा-मोती,नाही सोना-चांदी चाहिए,

म्हाने तो बस म्हारी झुंझनवाली दादी चाहिए

जद से झुंझनवाली को पल्लो म्हे पकड़्यो

आज तलक म्हारो कुछ नही बिगड़्यो

बस मोती सेठानी बारु महीना राजी चाहिए

म्हाने तो बस म्हारी झुंझनवाली दादी चाहिए

टाबरा नै रात-दिन देखती रवै माँ

झुंझनू से बैठी बैठी भेजती रवै माँ

नाही डूबन देवे नैया,ऐसी मांझी चाहिए,

म्हाने तो बस म्हारी झुंझनवाली दादी चाहिए

बनवारी ऐसो तो दरबार मिले ना

मावड़ी बिना परिवार चले ना

थारे चरना की माँ प्रीत साँची-साँची चाहिए,

म्हाने तो बस म्हारी झुंझनवाली दादी चाहिए

थारो देख लियो दरबार

इब के मांगन की दरकार

नाही हीरा-मोती,नाही सोना-चांदी चाहिए,

म्हाने तो बस म्हारी झुंझनवाली दादी चाहिए

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।