नवियां विहाइयाँ जोड़ियां रोट बाबे दे चङोन चलियाँ

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॥ पावन पाठ ॥

नवियां विहाइयाँ जोड़ियां रोट बाबे दे चङोन चलियाँ,

आउंदे साल पाउन लोहड़ियाँ वर बाबा जी तो पाउन चलिया,

नवियां विहाइयाँ जोड़ियां रोट बाबे दे चङोन चलियाँ,

दिल वाली रीज पूरी बाबा जी ने करती,

खुशियां दे नाल साड़ी झोली ओहने भर ती,

झंडे हथा विच फदे होये ने ओहदा शुक्र मनाऊन चलियाँ

नवियां विहाइयाँ जोड़ियां रोट बाबे दे चङोन चलियाँ,

सारा परिवार होया फिरदा त्यार जी,

नाल चले होर भी कई रिश्ते दार जी,

ढोल वजदे ने पैन भंगड़े सुखी सुखना जो लाउन चली आ,

नवियां विहाइयाँ जोड़ियां रोट बाबे दे चङोन चलियाँ,

रतनो दे मंदिर च मथा पहला टेकना,

जाके गरुणाझाडी भी है असि बैठना,

इक लाल बाबा जी तो मंगना गल दिल दी सुनान चली आ,

नवियां विहाइयाँ जोड़ियां रोट बाबे दे चङोन चलियाँ,

आउंदे साल असि मथा पूत दा टिकावागे,

सोने दी बना के सिंगी बाबा जी दे पावा गे,

सोनी पटी वाला सच आख दा ओहदा दर्शन पाउन चली आ,

नवियां विहाइयाँ जोड़ियां रोट बाबे दे चङोन चलियाँ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।