सांवरिया मुझको देना बस इतना वरदान

सौरभ मधुकर
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सांवरिया मुझको देना बस इतना वरदान

अंत समय मेरी जुबां से निकले तेरा नाम

जय जय श्याम,जय जय श्याम,

जय जय श्याम,जय जय श्याम

खो जाऊं जब पंच-तत्व में,हो वृन्दावन धाम

अंत समय मेरी जुबां से निकले तेरा नाम

जय जय श्याम,जय जय श्याम,

जय जय श्याम,जय जय श्याम

बिन मांगे सब कुछ देकर दया दिखाई है कान्हा

पल पल साथ मेरा देकर लाज बचाई है कान्हा

एक नहीं लाखो मुझपर है तेरा एहसान

अंत समय मेरी जुबां से निकले तेरा नाम

जय जय श्याम,जय जय श्याम,

जय जय श्याम,जय जय श्याम

नाम तुम्हारा ले लेकर हुआ मुझे एहसास यही

खुश रहता है भगत तेरा,रहता कभी उदास नहीं

नाम तुम्हारा कर देता हर मुश्किल आसान

अंत समय मेरी जुबां से निकले तेरा नाम

जय जय श्याम,जय जय श्याम,

जय जय श्याम,जय जय श्याम

जिस दिन निकले प्राण मेरा,सामने हो तस्वीर तेरी

मुख पर तेरा नाम हो,लिख ऐसी तक़दीर मेरी

बनवारी इस सेवक का कर इतना सा काम

अंत समय मेरी जुबां से निकले तेरा नाम

जय जय श्याम,जय जय श्याम,

जय जय श्याम,जय जय श्याम

खो जाऊं जब पंच-तत्व में,हो वृन्दावन धाम

अंत समय मेरी जुबां से निकले तेरा नाम

जय जय श्याम,जय जय श्याम,

जय जय श्याम,जय जय श्याम

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।