नचना तू डमरू वजा दे भोलियाँ लमी बांह करके

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मस्त मलंगा शिव मस्ती च आजा,

अखियां निमानियाँ नु दर्श दिखा जा,

हाल दिल वाला दसना है ता करके,

नचना तू डमरू वजा दे भोलियाँ लमी बांह करके,

मसा मसा मिलियाँ एह वेला नहीं सी मिलदा,

करदे नहीं पूरा आज चा साढ़े दिल दा,

हामी भरदे तू मस्ती दी छा करके,

नचना तू डमरू वजा दे भोलियाँ लमी बांह करके,

डम डम डमरू भोले तेरा वज्दा नचने नु चित करदा है सारे जग दा,

ताहियो नच पाइयाँ हां करके,

असि नचना तू डमरू वजा दे भोलियाँ लमी बांह करके,

नरेश तेरे तो जावे भोलेया वे सद के,

हो जाना आज कमले नि आज नच नच के,

आवे शेहरिये रमन दी बांह फड़ के,

नचना तू डमरू वजा दे भोलियाँ लमी बांह करके,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।