अब तो मान कहयो मेरी मांय

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

अब तो मान कहयो मेरी मांय, म्हाने सावंरियो परणाय

अब तो मान कहयो मेरी मांय, म्हाने सावंरियो परणाय

सांवरियो प्रणाय मात मेरी सांवरियो प्रणाय, मात मेरी सांवरियो प्रणाय

ऐसे वर को क्या वरु, ऐ जो जन्मे और मर जाय मात मेरी जन्मे और मर जाय,

वर पायो मेरो साँवरो, ऐ.मेरो चुड़ो अमर हो जाय मत मेरी चूड़ो अमर हो जाय,

मात मेरी सांवरियो प्रणाय ,

अब तो मान कहयो मेरी मांय, म्हाने…………….

सर्प पिटारा राणा भेज्या, रे.. दो मीरा न जाय, मात मेरी दो मीरा न जाय,

खोल पिटारा मीरां पहरियो, रे बन गयो नौसल हार, मात मोरी बन गयो नौसल हार ,

मात मेरी सांवरियो प्रणाय ,

अब तो मान कहयो मेरी मांय, म्हाने…………….

ज़हर का प्यालो राणा भेजियो, रे.. दो मीरा न जाय, मात मेरी दो मीरा न जाय,

कर चरणामृत पी गई, रे थे जानो रघुनाथ, मात मेरी थे जानो रघुनाथ ,

मात मेरी सांवरियो प्रणाय

अब तो मान कहयो मेरी मांय, म्हाने…………….

मीरा हर की लाड़ली, रे.. राणा वन को ठूँठ, मात मोरी राणा वन को ठूँठ

समझायो समझयो नहीं, रे.. ले जाती बैँकूट, मात मोरी ले जाती बैँकूट ,

मात मेरी सांवरियो प्रणाय,

अब तो मान कहयो मेरी मांय, म्हाने…………….

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।