मेरे श्याम बदल ना जाना

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

रुत बदले चाहे दिन बदले चाहे बदले सारा ज़मान

मेरे श्याम बदल ना जाना भगवन बदल ना जाना

कदम कदम पर पानी बदले चार कोस पे वाणी

सुख दुःख दुःख सुख में बदले निर्धन हो धनवानी

यही दुआ बस सुबह शाम मैं करता हूँ रोज़ाना

मेरे श्याम बदल ना जाना ................

बचपन से मैं करता आया अपनी ही मनमानी

जगह जगह जब ठोकर खायी तब ये बात है जानी

तू ही है इस जग का दाता तू ही पार लगाना

मेरे श्याम बदल ना जाना ................

मेरी लाज है तेरे हाथ में तुमने लाज बचानी

कहीं डूब ना जाए नैया तुमने पार लगनी

विजयराज और गुलशन मिलके गाये यही तराना

मेरे श्याम बदल ना जाना ................

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।