अपना हरी है हज़ार हाथ वाला ओ दीन दयाला

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

अपना हरी है हज़ार हाथ वाला ओ दीन दयाला,

मैं कहता डंके की चोट पर ध्यान से सुनियो लाला,

अपना हरी है हज़ार हाथ वाला ओ दीन दयाला,

कौन बटोरे कंकर पत्थर जब हो हाथ में हीरा,

कंचन सदा रहेगा कंचन और कथीर कथीरा,

साँच के आगे झूठ का निकला हर दम यहाँ दिवाला,

अपना हरी है हज़ार हाथ वाला ओ दीन दयाला

कोई जुका नहीं सकता जग में अपने प्रभु का झंडा ,

जो उसको छेड़े गा उसके सिर पे पड़े गा डंडा,

युगो युगो इस धरती पर इसी का है बोल बाला,

अपना हरी है हज़ार हाथ वाला ओ दीन दयाला

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।