तेरा दर जोगी

पारंपरिक
अन्य भजन बाबा बालक नाथ भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

तेरा दर जोगी स्वरगा तो सोहना तेरे दर ते रह के मैं सेवादार कहावा,

तेरी करा बंदगी नाथ सदा तेरे सोहनिया चरना तो बलिहारी जावा,

तेरा दर जोगी स्वरगा तो सोहना

तू प्यार दा मीह बरसावे दुनिया प्यार है करदी,

इक नजर मेहर दी भावे सब दी झोली भरदी,

तेरे प्यार नाल महके आहलम सारा तेरे प्यार ना ही मैं जिंदगी न मेह्कावा,

तेरा दर जोगी स्वरगा तो सोहना

तनु कहन्दे बालक नाथ ते च्मते वाला बाली,

मेरा मन मोह लेंदी तेरी सूरत भोली भाली,

तू सिंगियाँ वाला दूधाधारी तनु रत्नो दे पूत मैं न कदे भुलावा,

तेरा दर जोगी स्वरगा तो सोहना

राजू हरिपुरिये वांग तू सुन ले मेरी विनती,

तेरे भगता दे विच पारस दी भी हो जाए गिनती,

न कदे विसारा नाम तेरे नू भूल के जे बिसरा मैं दुनिया छड़ जावा,

तेरा दर जोगी स्वरगा तो सोहना

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।