एक बार माँ आजाओ

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॥ पावन पाठ ॥

एक बार माँ आजाओ फिर आके चली जाना,

हमे दर्श दिखा जाओ दिखला के चली जाना

तुम को मेरे गीतों का संगीत भुलाये माँ,

कुछ मेरी भी सुन जाओ कुछ अपनी सुना जाना,

एक बार माँ आजाओ फिर आके चली जाना

क्या मेरे तड़पने का एहसास नहीं तुम को,

किस बात रूठी हो इतना तो बता जाना,

एक बार माँ आजाओ फिर आके चली जाना

अखियां मेरी रोती माँ इहने धीर बंधा जाओ

मझधार में है नइयाँ इसे पार लगा जाना,

एक बार माँ आजाओ फिर आके चली जाना

जब जब भी भुलावों माँ दौड़ा चला आउ मैं,

अगर राह भटक जाऊ रस्ता तो दिखला जाना,

एक बार माँ आजाओ फिर आके चली जाना

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।