मैं साई तेरी कमली हो गई

पारंपरिक
अन्य भजन साईं भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

देखा नजारा जो साई के दर का,

पहली दफा मैंने शिरडी नगर का,

जागी किस्मत मेरी जो थी सोइ,

मैं साई तेरी कमली हो गई,

नाचू गी मैं साई दरबार पे बंधे घुँघरू पाँव में,

आज मुकदर मेरा जगे गा शिरडी के इस गांव में,

मैं जो शिरडी नगरियां में गई,

मैं साई तेरी कमली हो गई,

मस्त मलंगा बन के मन ये साई साई कहता है,

मेरे मन का साई प्रीत का इक दरया सा बहता है,

ऐसी प्रीत में मैं साई खोई,

मैं साई तेरी कमली हो गई,

लोक लाज साई ही भुलाके साई की मैं हो बैठी,

साई की मूरत के आगे ध्यान लगा कर जो बैठी,

बस सांवरियां मैं उनकी हो गई,

मैं साई तेरी कमली हो गई,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।