हम पागल हैं पागल वृन्दावन धाम के

चित्र विचित्र
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हम पागल हैं पागल वृन्दावन धाम के

वृन्दावन धाम के, श्री श्यामा शाम के

डोले श्याम नाम के पागल, वृन्दावन पागल खाने में

मस्ती में मस्त हैं रहते, मिले पागलपन नज़राने में

मन तू भी पागल हो जा, मस्ताने तरंग में खो जा

चढ़ जाए ना साफिर नाम के जाम में,

हम पागल हैं पागल वृन्दावन धाम के

पूरे मन से जो लग जाता, वो लग कर कुछ पा लेता है

सदा अंग संग हरी रहता पर ध्यान ना कोई देता है

कोई झूठे नाम के पागल, कोई सच्चे श्याम के पागल,

जहा दूर दूर तक पागल जगत तमाम में,

हम पागल हैं पागल वृन्दावन धाम के

कितने हुए अब तक पागल इन की न कोई समायी

मीरा करमा विधुरानी शबरी गोपाली बाई

पावन भक्तो के चरित्र हृदय को करे पवित्र

पागल करे ‘चित्र विचत्र’ श्री राधा नाम के

हम पागल हैं पागल वृन्दावन धाम के

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।