साई जी पधारो माहरे अंगना

पारंपरिक
माँ गंगा भजन साईं भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

साई जी पधारो माहरे अंगना,

पधारो माहरे अंगना विराजो महारे अंगना,

साई जी पधारो माहरे अंगना,

तेरे आवन के मैं तो वारि वारि जाऊ,

वारि वारि जाऊ तेरे दर्शन पाउ,

साई जी पधारो माहरे अंगना,

बाजी तेरे संग खेलु मैं हारु,

आजो न तन मन तुझपे वारु,

साई जी पधारो माहरे अंगना,

प्रेम की गंगा साई तुम हो बहाते,

जो भी भुलाते साई दौड़े चले आते,

साई जी पधारो माहरे अंगना,

अंगना में बैठी हु दीपक जलाये,

क्या है खबर साई कब आ जाये,

साई जी पधारो माहरे अंगना,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।