तेरे दर पे आके मुझे क्या मिला है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तेरे दर पे आके मुझे क्या मिला है,

ये मैं जानता हु या तू जानता है

ज़माने की चल घट बड़ी बे तुकी है,

जिधर देख ता हु मैं उधर सब दुखी है,

गिर के दुखो में भी मैं क्यों सुखी हु,

ये मैं जानता हु या तू जानता है

चेहरे पे चेहरे सभी है लगाये,

चोट गेहरो से जयदा अपनों से खाये,

मुझे किस से कैसा शिकवा गिला है,

ये मैं जानता हु या तू जानता है

अकेला समज कर सताया जहां ने,

कदम दर दर मुझको रुलाया जहां ने.

कैसे हसी का ये कमल ये खिला है,

ये मैं जानता हु या तू जानता है

डुभे गई नैया कहती थी दुनिया,

पतन की उमीदो में रहती थी दुनिया,

नैया को कैसे किनारा मिला है,

ये मैं जानता हु या तू जानता है

अंदर घना था न दिखती थी राहे,

तूने समबाला मुझको फैला के बाहे,

नैनो को संजू कैसे उजाला मिला है,

ये मैं जानता हु या तू जानता है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।