झूला झूल रही मेरी मईया

पारंपरिक
हनुमान जी भजन दुर्गा भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

झूला, झूल रही मेरी मईया, संग में झूल रहे हनुमान ll

झूल रहे हनुमान कि संग में, झूल रहे हनुमान

हो झूला, झूल रही मेरी मईया,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

हाथ जोड़ के भक्त पुकारे, दे दो माँ वरदान,,हो,,

भैरों बाबा अर्ज़ी लगावे, कर दो माँ कल्याण

हो झूला, झूल रही मेरी मईया,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

अष्ट भुजी माँ शेर सवारी, माँ की है पहचान,,हो,,

उसको दर्शन हो जाए जिसने, कर लिया माँ का ध्यान

हो झूला, झूल रही मेरी मईया,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

सच्ची भक्ति अम्बे माँ की, झूठी जग्ग की शान,,हो,,

तीन लोक में डंका वाजे, भक्त करें गुणगान

हो झूला, झूल रही मेरी मईया,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

हाथ जोड़ के शीश झुका के, कहते जय भगवान,,हो,,

ऐसी शक्ति पैदा कर गई, शिव शंकर भगवान

हो झूला, झूल रही मेरी मईया,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।