भोले तेरी किरपा बिन अधूरा हु मैं

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले तेरी किरपा बिन अधूरा हु मैं,

तू ही है मदारी जमूरा हु मैं,

तेरी महिमा जानू ये औकात नहीं है,

ऐसी कोई मुझमे बात नहीं है,

अवगुण भरे है बेसुरा हु मैं,

तू ही है मदारी जमूरा हु मैं,

जैसे तू चलाये वैसा चलता रहु मैं भोले तेरे टुकड़ो पे पलता रहु मैं,

भगति के नूर बिन बे नूरा हु मैं,

तू ही है मदारी जमूरा हु मैं,

डोर मेरी बस तेरे हाथ रहे रेहमत की होती बरसात रहे,

नहीं भोला कमल सिंह पूरा हु मैं,

तू ही है मदारी जमूरा हु मैं,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।