हे राम का आज्ञाकारी हे शंकर का अवतारी

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

हे राम का आज्ञाकारी हे शंकर का अवतारी

म्हारे सिर पे हाथ फिराओ मैं शरण पड्या हाँ थारी

म्हाने पल पल पल पल थी याद सातवे है

हे वीर बलि म्हणे थारी ओल्यू आवे है

म्हारे जी में आवे बाबा थे धाम आ जावां

थारे धाम आके थारे चरना में लुड़ जावां

म्हणे बेगा हुकम सुनाओ सालासर धाम बुलाओ

म्हें आस लगाया बैठ्या थे म्हारी आस पुराओ

म्हाने पल पल पल पल थी याद सातवे है

हे वीर बलि म्हणे थारी ओल्यू आवे है

थारा देसी घी का लाडू म्हाने याद आवे है

थारो भोग चूरमो बाबा म्हाने बहुत भावे है

पूरब मुख मंदिर थारो म्हाने लागे प्यारो प्यारो

थे आवनिया का बाबा से बिगड्या काम संवारो

म्हाने पल पल पल पल थी याद सातवे है

हे वीर बलि म्हणे थारी ओल्यू आवे है

म्हारो भेद हिये को बाबा थारे शामी खोलांगा

जो थां सूं ना बोला तो म्हें किसने बोलांगा

थारी हर्ष घनी सकलाई बेगा सा करो सुनाई

शरणागत का दुःख मेटो थाने राम प्रभु की दुहाई

म्हाने पल पल पल पल थी याद सातवे है

हे वीर बलि म्हणे थारी ओल्यू आवे है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।