तेरी दया से सुबह होती तेरी दया से शाम

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॥ पावन पाठ ॥

साई तेरी चौकठ पे बन जाये बिगडे काम,

तेरी दया से सुबह होती तेरी दया से शाम

शिरडी के कोने कोने में तेरा रूप समाया है,

तू सुख देदे या दुःख देदे साई तेरी माया है,

यहाँ तुम्हारे कदम पड़े वह बन गया शिरडी धाम,

तेरी दया से सुबह होती तेरी दया से शाम.

तेरी शरण में आने वाला कभी न खाली जाये,

साई नाथ मेरा भगतो के बिगड़े काम बनाये,

ऐसी किरपा करदो मेरे लब पे रहे तेरा नाम,

तेरी दया से सुबह होती तेरी दया से शाम.

साई ऐसा वर दो जब मैं इस दुनिया से जाऊ,

यही आरजू बाली बाल तुझको ही सामने पाऊ,

तू ही मेरा कृष्ण कन्हियाँ तू ही भोले नाथ,

तेरी दया से सुबह होती तेरी दया से शाम.

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।