चिंता हो ना भय हो राधा रानी की जय हो

सर्व मोहन (टीनू सिंह)
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

चिंता हो ना भय हो, राधा रानी की जय हो,

ऊँची अटारी वारी प्यारी की जय हो ।

रे मन मूरख चिंता न कर जप ले राधा राधा,

कोटि जनम की विपदा काटे राधा नाम यह आधा ।

हरी प्रकट हो ऐसी नाम खुमारी की जय हो,

चिंता हो ना भय हो, राधा रानी की जय हो ॥

जप तप सयम ना जानू, ना जानू कोई पूजा,

एक भरोसा श्री कुंवारी को, नाही कोई दूजा ।

शुक नारद भी गाये महिमा नयारी की जय हो,

चिंता हो ना भय हो, राधा रानी की जय हो ॥

जिनकी कृपा से वृन्दावन में मोहन मुरली बजाई,

टेड़े कदम के आगे खाडे, मुरली मधुर बजाई ।

ऐसो रस बरसाने वारी की जय हो,

चिंता हो ना भय हो, राधा रानी की जय हो ॥

'हरी दासी’ सब छोड़ झमेले, बरसाने चली आना,

संतो के चरणो में जा के सांचो भाव जगाना ।

कोटि चद्र रूप उज्जयारी की जय हो,

चिंता हो ना भय हो, राधा रानी की जय हो ॥

राधा रानी की जय, राधा रानी की जय

बोलो रस बरसाने वारी की जय

बोलो ऊँची अटारी वारी प्यारी की जय

राधा रानी की जय, राधा रानी की जय

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।