दो दिन में कोण सा तेरा झुंझुन भागे से

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॥ पावन पाठ ॥

दो दिन में कोण सा तेरा झुंझुन भागे से,

सिंह पर चढ़ कर आजा कौन सा बाहड़ा लागे से,

तने तो घर पर आना से कौन सा मुहरत करवाना से,

शिंगशान कौन ले जा तेरा पाशा दरबार लगाना से,

व्यापार करे कौन सा जो तेरा घाटा लागे से,

दो दिन में कोण सा तेरा झुंझुन भागे से,

सवारी कौन सी लानी से तने उधार में दादी,

जो तेरी सिंह सवारी है खड़े बेकार में दादी,

अगर काम नहीं आवे आने क्या ताहि राखे से,

सिंह पर चढ़ कर आजा कौन सा बाहड़ा लागे से,

मेरे परिवार से मैया के तेरा मेल करना से,

के कुन सा काम करवाना से के कुनसा खेत जोतना से,

कर लीजिये आराम तेरा कमरा राख्या से,

सिंह पर चढ़ कर आजा कौन सा बाहड़ा लागे से,

परायो संजो घर मेरो के तू इक काम कर मइयां,

के घर को पतो बनवारी तू तेरे नाम कर मइयां,

इ बात को धोखो माँ क्यों दिल में राखे से,

सिंह पर चढ़ कर आजा कौन सा बाहड़ा लागे से,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।