गंगा मियां तू सब की पीड़ मिटा देना

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

तेरी निर्मल पावन धार माँ करती सब का उधार माँ,

जो आये शरण तू उसको पार लगा देना,

गंगा मियां तू सब की पीड़ मिटा देना,

श्री हरी के चरणों में था तेरा वसेरा मईयां

ब्रह्मा जी ने आज्ञा देके धरा पे उतारा मईयां,

तेरा वेग मियां जी भारी विकराला था,

भोले ने सिर ऊपर तुम को सम्बाला था,

है पाप नाशनी पाँवन हमे बना देना,

गंगा मियां तू सब की पीड़ मिटा देना,

भगी रथ की विनती मानी दिन वरदान माँ,

सगर जी के पुत्रो का किया कल्याण माँ,

आठो ही वस्तुओं का तूने शाप काटा था

पापो को ले तुमने बस प्यार बांटा था,

अमिरत बर्षा कर मियां सदा पीला देना,

गंगा मियां तू सब की पीड़ मिटा देना,

भारत है देश मेरा ऋषियों की भूमि मियां,

राम कृष्ण अर्जुन की यही कर्म भूमि मईयां

आकर के सब तुझमे डुबकी लगा ते है,

रश्मी विसरियाँ भी तेरे गीत गाते है,

हमे अंत समय में अपनी गोद बिठा लेना,

गंगा मियां तू सब की पीड़ मिटा देना,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।