भगवा रंग का चोला

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॥ पावन पाठ ॥

भारत माँ के चरण से नाता जोड़ लिया मैंने,

भगवा रंग का चोला अब तो ओहड़ लिया मैंने,

भगवा मेरी शान है इस पे जान लुटा सकते है हम,

आन कभी न जाने देंगे सिर भी कटवा सकते है हम,

मोह और माया का चाकर छोड़ दिया मैंने,

भगवा रंग का चोला अब तो ओहड़ लिया मैंने,

इक वार जो ठान लिया उसको पूरा करते है,

हिन्दू भगवा धरी किसी के बाप से भी न डरते है,

पूजा कहे दुश्मन की कमर को तोड़ दिया मैंने,

भगवा रंग का चोला अब तो ओहड़ लिया मैंने,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।