जय जय अग्रसेन महाराज

सौरभ मधुकर
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॥ पावन पाठ ॥

अग्रसेन के वंशज हैं हम, आगे बढ़ते जाएंगे

अग्रवंश की सेवा में हम मिलकर हाँथ बढ़ाएंगे

जय जय अग्रसेन महाराज,जय जय अग्रवाल समाज

जय जय अग्रसेन महाराज,जय जय अग्रवाल समाज

अग्रवाल हम , अग्रोहा ही पावन तीरथ हमारा

जन्मधाम , यह पुण्यधाम हमको प्राणो से प्यारा

नील गगन पे अटल-अडिग है जैसे ये ध्रुव तारा

अग्रवंश की गौरव-गाथा जान गया जग सारा

स्वर्णिम है इतिहास हमारा , हम मिलकर दोहराएंगे

अग्रवंश की सेवा में हम मिलकर हाँथ बढ़ाएंगे

जय जय अग्रसेन महाराज,जय जय अग्रवाल समाज

जय जय अग्रसेन महाराज,जय जय अग्रवाल समाज

एक ईंट और एक रुपैया अग्रसेन का नारा

अग्रवंश को अग्रसेन ने एक सूत्र में धारा

अग्रोहा की पुण्य धरा से दूर किया अँधियारा

जय महाराजा अग्रसेन की , गूँज उठा जयकारा

"सौरभ-मधुकर" अग्रसेन की गौरव गाथा गाएंगे

अग्रवंश की सेवा में हम मिलकर हाँथ बढ़ाएंगे

जय जय अग्रसेन महाराज,जय जय अग्रवाल समाज

जय जय अग्रसेन महाराज,जय जय अग्रवाल समाज

गीतकार - सौरभ मधुकर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।