मेरी शान विच्च फरक नहीं पैंदा

सर्व मोहन (टीनू सिंह)
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरा यार यशुदा कुंवर हो चूका है

वो दिल हो चूका है जिगर हो चूका है

जगत की सभी खूबियां मैंने छोड़ीं

ये दिल था इधर अब उधर हो चूका है

यह सच जानिये उसकी बस इक नज़र है

जो कुछ पास सब नजर हो चूका है

वो उस मस्त की खुद खबर ले रहा है

जो उसके लिए बेखबर हो चूका है

नहीं बिनु का अश्रु जल बिंदु है यह

यह उल्फत में लालो बुहर हो चूका है

मेरी शान विच्च फरक नहीं पैंदा

जे नच के मनावा यार नु

मन्ने यार ना ते कुंज वी नहीं रेह्न्दा

किवे मैं भुलावा यार नू

इहो इश्क दी नमाज़ दा असूल ए

बिना यार साडी बंदगी फजूल ए

कोई सजदा कबूल नहिओ पैंदा,

जे शीश न झुकावा यार नू

जग सो सो डरावे दे के गज्ज दा

पल्ला यार ने फड़ेया ए मेर लज्ज दा

लख मंदी होवां यार झल लैंदा

मैं किथे छड़ जावा यार नू

पिया मुरली वजावेगा मैं नचांगी

बन पैरा विच्च घुंघरू मैं जचांगी

कोई केहन्दा रवे कंजरी जे केहन्दा

मैं नाच्च के मनावा यार नू

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।