भगतो के घर कभी आओ माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन रानी सती दादी भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

आओ माँ आओ माँ भगतो के घर कभी आओ माँ,

परिवार तुम्हारा है हमे तेरा ही सहारा है,

आओ माँ आओ माँ भगतो के घर कभी आओ माँ

तेरे चरणों में बिश जायेगे पलकों पर तुमको बिठायेंगे,

हम तेरे भजन के मीठे मीठे गा गा कर तुझे सुनाये गे

आओ माँ आओ माँ भगतो के घर कभी आओ माँ

तू इस जग की महारानी है माँ तुझसे प्रीत पुराणी है,

इस दिल में है ढेरो बाते माँ आज तुम्हे बतलानी है,

आओ माँ आओ माँ भगतो के घर कभी आओ माँ

ये घर मंदिर बन जाएगा माँ इक बार तेरे आने से,

रोशन होगा जीवन मेरा माँ तेरी ज्योत जगाने से.

आओ माँ आओ माँ भगतो के घर कभी आओ माँ,

कहने को ये घर मेरा है पर इस पे हक माँ तेरा है,

दो दिन के किराए दार है हम सोनू यहाँ रेन बसेरा है,

आओ माँ आओ माँ भगतो के घर कभी आओ माँ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।