सैयां अपना बना लिया

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॥ पावन पाठ ॥

बेरंग दुनिया भी रंग भरी लगदी,

जदो भी आँख मेरी सैयां नाल लगदी,

सैयां ने रंग मैनु किश्ती चढ़ा लिया,

लाख दाता पीर मैनु अपना बना लिया,

तू विच मंडाली दे है रेह्न्दा आली शाह मेरा दाता,

सब दे दिल दी जान दा है ओह जो निजां मेरा दाता,

दर उते आके जिहने सिर नु झुका लिया,

अब्दुल शाह पीर मैनु अपना बना लिया........

अपना आप गवाना पेंदा प्यार किसे नल पाके,

बुल्ले शाह वांगु नचना पेंदा दर मुरशद दे जाके,

नच नच जिहने यार अपना बना लिया,

मुराद शाह पीर मैनु अपना बना लिया ....

पा किनारे लग्न जे फड् कामल पीर दा पल्ला,

रोज सवेरे उठ के बंदेया कहा कर बिस्मिला,

नाम ओहदा सच्चे दिलो जिहने भी ध्या लिया,

एमी चाँद पीर मैनु अपना बना लिया...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।