देख लिया जग मैंने सारा मेरे सांवरे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

देख लिया जग मैंने सारा मेरे सांवरे

तेरे द्वार जैसा ना तेरे खाटू जैसा ना नज़ारा मेरे सांवरे

देख लिया जग मैंने..................

जो भी इक वारि खाटू की नगरीय

मन में बसा गया यादों की गठरिया

फिर दिल लागे ना बेचारा मेरे सांवरे

तेरे द्वार जैसा ना तेरे खाटू जैसा ना नज़ारा मेरे सांवरे

देख लिया जग मैंने..................

खाटू के कण कण में आप ही समाये हैं

जय श्री श्याम श्याम गूंजती दिशाएं हैं

बहती है भक्ति की धरा मेरे सांवरे

तेरे द्वार जैसा ना तेरे खाटू जैसा ना नज़ारा मेरे सांवरे

देख लिया जग मैंने..................

कैसे करूँ वर्णन महिमा निराली को

नीले की सवारी को कमली वो काली को

झूलते निशान वो जैकारा मेरे सांवरे

तेरे द्वार जैसा ना तेरे खाटू जैसा ना नज़ारा मेरे सांवरे

देख लिया जग मैंने..................

करे सतविंदर बयां वो लिखाई से

सोच की कलम और आंसू की स्याही से

गोल्डी धामी ने भी दिल हारा मेरे सांवरे

तेरे द्वार जैसा ना तेरे खाटू जैसा ना नज़ारा मेरे सांवरे

देख लिया जग मैंने..................

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।