तेरी ज्योत जगावन माँ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरी ज्योत जगावन माँ आया शहर सारे दा सारा,

तेरे दर ते संगत है नचदी नच नच के धुना है पट दी,

तेरा दर्शन पावन माँ आया शहर सारे दा सारा,

तेरी ज्योत जगावन माँ आया शहर सारे दा सारा,

तेरे दर ते झुल्दा झंडा माँ लिशकारे पाई जांदा है,

मुहो मंगियाँ मुरादा वंडदी है जो दर तेरे ते औंदा है,

दर छतर चड़ावन माँ आया शहर सारे दा सारा,

तेरी ज्योत जगावन माँ आया शहर सारे दा सारा,

तेरे दर ते जो भी औंदा है खाली हाथ कदे न जांदा है,

ओह लखा खुशियाँ पा लेनदा जो श्रधा नाल ध्याऊंदा है,

दर शीश झुकवन माँ आया शहर सारे दा सारा,

तेरी ज्योत जगावन माँ आया शहर सारे दा सारा,

तू लखा पापी तारे ने माँ भगता नु भी तार दी,

विपन भी माँ तेरे दर आया ओहदे विग्ड़े काज सवार दी,

तेनु दुखड़ा सुनवान माँ आया शहर सारे दा सारा,

तेरी ज्योत जगावन माँ आया शहर सारे दा सारा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।