तोहि मोहि मोहि तोहि अंतर् कैसा

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॥ पावन पाठ ॥

तोहि मोहि मोहि तोहि अंतर् कैसा अंतर् कैसा,

कनक कटिक जल तरंग जैसा जल तरंग जैसा,

तोहि मोहि मोहि तोहि .........

जीउ पे हम न पाप करंता आहे अंता,

पतित पावन नामु कैसा हूँता कैसा हूँता,

कनक कटिक जल तरंग जैसा जल तरंग जैसा,

तोहि मोहि मोहि तोहि .........

तुम जो नायक आछहु अन्तर्यामी,

प्रभु ते जनु जाणिजे जन ने स्वामी,

कनक कटिक जल तरंग जैसा जल तरंग जैसा,

तोहि मोहि मोहि तोहि .........

सरीरु अराधे सो क्यों बिचुर देहु,

रविदास सम दल सम्जाये कियु सम्जाये कियु,

कनक कटिक जल तरंग जैसा जल तरंग जैसा,

तोहि मोहि मोहि तोहि .........

ਤੋਹੀ ਮੋਹੀ, ਮੋਹੀ ਤੋਹੀ, ਅੰਤਰੁ ਕੈਸਾ, ਅੰਤਰੁ ਕੈਸਾ ॥

ਕਨਕ ਕਟਿਕ, ਜਲ ਤਰੰਗ ਜੈਸਾ, ਜਲ ਤਰੰਗ ਜੈਸਾ ॥

ਤੋਹੀ ਮੋਹੀ, ਮੋਹੀ ਤੋਹੀ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

ਜਉ ਪੈ ਹਮ ਨ, ਪਾਪ ਕਰੰਤਾ,, ਅਹੇ ਅਨੰਤਾ ॥

ਪਤਿਤ ਪਾਵਨ ਨਾਮੁ, ਕੈਸੇ ਹੁੰਤਾ, ਕੈਸੇ ਹੁੰਤਾ ॥

ਕਨਕ ਕਟਿਕ, ਜਲ ਤਰੰਗ ਜੈਸਾ, ਜਲ ਤਰੰਗ ਜੈਸਾ ॥

ਤੋਹੀ ਮੋਹੀ, ਮੋਹੀ ਤੋਹੀ,,,,,,,,,,,,,,,,,,

ਤੁਮ੍ ਜੋ ਨਾਇਕ, ਆਛਹੁ, ਅੰਤਰਜਾਮੀ ॥

ਪ੍ਰਭ ਤੇ ਜਨੁ, ਜਾਨੀਜੈ, ਜਨ ਤੇ ਸੁਆਮੀ ॥

ਕਨਕ ਕਟਿਕ, ਜਲ ਤਰੰਗ ਜੈਸਾ, ਜਲ ਤਰੰਗ ਜੈਸਾ ॥

ਤੋਹੀ ਮੋਹੀ, ਮੋਹੀ ਤੋਹੀ,,,,,,,,,,,,,,,,,,

ਸਰੀਰੁ ਆਰਾਧੈ, ਮੋ ਕਉ, ਬੀਚਾਰੁ ਦੇਹੂ ॥

ਰਵਿਦਾਸ, ਸਮ ਦਲ, ਸਮਝਾਵੈ ਕੋਊ, ਸਮਝਾਵੈ ਕੋਊ ॥

ਕਨਕ ਕਟਿਕ, ਜਲ ਤਰੰਗ ਜੈਸਾ, ਜਲ ਤਰੰਗ ਜੈਸਾ ॥

ਤੋਹੀ ਮੋਹੀ, ਮੋਹੀ ਤੋਹੀ,,,,,,,,,,,,,,,,

ਅਪਲੋਡਰ- ਅਨਿਲ ਰਾਮੂਰਤੀ ਭੋਪਾਲ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।