कैसी मुरलीया बजाई रे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कैसी मुरलीया बजाई रे,

छलिया मनमोहन ,

में तो दौड़ी दौड़ी चली आई रे,

काहे को ऐसी मुरली बजाये,

मेरे मन को चेन ना आये,

नँदलाला औ कन्हैया ......

भूल गई में सब काम अपना ,

आई में घर से करके बहाना,

छलिया मनमोहन ,

में तो दौड़ी दौड़ी चली आई रे,

सारी सखियाँ मारे है ताने,

तुम तो अपनी धुन में दीवाने,

नँदलाला औ कन्हैया ......

मेरे घर पर मेरा सजन है,

लेकिन मेरा तुझपे ही मन है,

छलिया मनमोहन ,

में तो दौड़ी दौड़ी चली आई रे,

पनघट पर मेरी बय्या मरोडी,

मैं जो बोली मेरी मटकी ही फोड़ी,

मुझको कन्हैया,

मिल जायेगा जिस दिन,

छिन लूँगी मुरली में उस दिन,

छलिया मनमोहन ,

में तो दौड़ी दौड़ी चली आई रे,

चल के पनघट पे,

तलक प्यार की दो बात करे ,

जल भरने के बहाने से मुलाकात करे,

छेड़ खानी ना करो नार नवेली हूँ में,

सर पे गागर है और अकेली हूँ मैं

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।