पर्वत चीर के निकली माँ ज्वाला

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

पर्वत चीर के निकली माँ ज्वाला करिश्मा कैसा कर डाला,

फैला ज्योति का जग में उजाला करिश्मा कैसा कर डाला,

करिश्मा कैसा कर डाला

मैया ने महिमा ये सब को दिखाई,

पर्वत से मैया की ज्योत लहराई

माँ का चमत्कार सब से निराला,

पर्वत चीर के निकली माँ ज्वाला करिश्मा कैसा कर डाला,

अभिमानी राजा ने छतर चढ़ाया,

उसके उपहार को माँ ने ठुकराया,

सोने के ताज पल में कर दियां काला,

पर्वत चीर के निकली माँ ज्वाला करिश्मा कैसा कर डाला,

कांगड़े माँ की शान निराली,

जो भी सवाली आये लौटे न खाली,

भक्तो के संकट को हर दम है टाला,

पर्वत चीर के निकली माँ ज्वाला करिश्मा कैसा कर डाला,

हर दम लगे यहाँ भगतो का ता ता मन की मुरादे यहाँ हर कोई पाता,

नवरातो में लागे यहाँ मेला अलबेला,

पर्वत चीर के निकली माँ ज्वाला करिश्मा कैसा कर डाला,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।