माँ मैं तेरी कठपुलती

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

माँ मैं तेरी कठपुलती तेरा हुकम भजाउ गी,

तू डोर हिलाना मावड़ी मैं नाच दिखाऊ गी,

मेरा वजूद कुछ नहीं मैं जड़ हु मावड़ी,

माँ तेरे इक इशारे पे चेतन हो जाऊगी,

तू डोर हिलाना मावड़ी मैं नाच दिखाऊ गी,

मेरी नकेल तो तेरे हाथो में है मइयां,

तू चाहे जिधर घुमाले मैं घूम जाऊगी ,

तू डोर हिलाना मावड़ी मैं नाच दिखाऊ गी,

तेरे हर्ष को दरबार में जितना नचा लेना,

दुनिया में नहीं नचाना,मैं थिरक न पाउगी

तू डोर हिलाना मावड़ी मैं नाच दिखाऊ गी,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।