नैनों में श्याम समायो

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

नैनों में श्याम समायो मोहे प्रेम का रोग लगायो,

मैं सुध बुध बुली सारी मुझे एसो रोग लगायो,

मेरी नस नस में बन के लहू तू समायो है,

छलिया ने मोहे प्रेम को रोग लगाया है,

नैनों में श्याम समायो.......

इक दीना सपने वो आयो मेरो पास,

तंग किया बाबा ने एसो मैं जागी सारी रात,

रातो की नींद उड़ाई चित चोर बड़ा हरजाई,

मेरी नस नस में बन के लहू तू समायो है,

छलिया ने मोहे प्रेम को रोग लगाया है,

नैनों में श्याम समायो.......

जब जब मुरलीवो भजावे मेरा दिल घायल हो जाये,

मैं बन जाओ श्याम दीवानी मेरी समज में कुछ न आये,

शलिंदर संवारा गाये लिख कलम से वो बतलाये,

मेरी नस नस में बन के लहू तू समायो है,

छलिया ने मोहे प्रेम को रोग लगाया है,

नैनों में श्याम समायो.......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।