जिंदगी में हजारो का मेला जुड़ा

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॥ पावन पाठ ॥

जिंदगी में हजारो का मेला जुड़ा,

हंस जब भी उड़ा अकेला उड़ा,

राज राजा रहे न वो रानी रही,

न भूड़ापा रहा न जवानी रही,

चार दिन का जगत में यमेला रहा,

हंस जब भी उड़ा अकेला उड़ा,

ठाठ सब पड़े के पड़े रह गये,

सारे धन व के घड़े के घड़े रह गये,

अंत में लखपति के न ढेला चला,

हंस जब भी उड़ा अकेला उड़ा,

वेबसो को सताने से क्या फयादा,

दिल किसी का दुखाने से क्या फयादा,

नीम के साथ जैसे करेला जुड़ा,

हंस जब भी उड़ा अकेला उड़ा,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।