राधे कभी बनेगा तो समजेगा सँवारे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

राधे कभी बनेगा तो समजेगा सँवारे,

रोते है क्यों विरहा में ये नैन वनवारे,

राधे कभी बनेगा तो समजेगा सँवारे,

तू किसी को दिल से चाहे तेरा दिल वो तोड़ जाये,

छलिया तुझे भी कोई राहो में छोड़ जाये,

क्या बीत ती है दिल पे जो प्रीतम दगा करे

राधे कभी बनेगा तो समजेगा सँवारे,

चुब्ते है शूल बन कर क्यों फूल पाँव में,

लगता नहीं है मन क्यों अपने गांव में

क्यों चाहता है जीके कोई बात न करे,

राधे कभी बनेगा तो समजेगा सँवारे,

एक युग सा गुजर ता है इक पल जुदाई वाला,

उस पल की पीड़ तू क्या जाने ओह नन्द लाला,

जिसे तू न भूल पाये वो तुझे याद न करे,

राधे कभी बनेगा तो समजेगा सँवारे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।